II जगत गुरु बाबा गरीबदास जी की बाणी II अमर करू सतलोक पाठाॐ, ताते बन्दी छोड़ कहाॐ I हम ही सतपुरुष दरवानी, मेट्टू उत्पति आवा जानी I जो कोई कहा हमारा माने, सार शब्द कुं निश्चय आने I हम ही शब्द शब्द की खानी, हम अविगत प्रवानी I हमरे अनहद बाजे बाजे, हमरे किये सभे कुछ साजे I हम ही लहर तरंग उठावे , हम ही प्रगट हम छिप जावे I हम ही गुप्त गुह्ज गम्भीरा, हम ही अविगत हमे कबीरा I हम ही गरजे,हम ही बरषे, हम ही कुलफ जड़े हम निरखे I हम ही सराफ जोहरी कहिया, हमरे हाथ लेखन सब बहिया I यह सब खेल हमरे किये, हमसे मिले सो निश्चय जीये I हम ही अदली जिन्दा जोगी , हम ही अमी महारस भोगी I हमरा भेद न जाने कोई , हम ही सत्य शब्द निरमोहि I ऐसा अदली दीप हमारा , कोटि बैकुण्ठ रूप की लारा I संख पदम एक फुनि पर साजे , जहाँ अदली सत्य कबीर विराजे I जहाँ कोटिक विष्णु खड़े कर जोरे, कोटिक शम्भु माया मोरे I जहाँ संखो ब्रह्म वेद उचारी , कोटि कन्हेया रास विचारी I हम है अमर अचल अनरागी, शब्द महल में तारी लागी I दास गरीब हुक्म का हेला , हम अविगत अदली का चेला I ॐ सत सहिब
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